श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.28.15

एकादश स्कन्ध · अध्याय 28 · अथाष्टाविंशोऽध्यायः

शोकहर्षभयक्रोधलोभमोहस्पृहादयः ।

अहंकारस्य दृश्यन्ते जन्म मृत्युश्‍च नात्मनः॥ १५

śokaharṣabhayakrodhalobhamohaspṛhādayaḥ |

ahaṃkārasya dṛśyante janma mṛtyuśca nātmanaḥ|| 15

अर्थ

उद्धवजी! अहंकार ही शोक, हर्ष, भय, क्रोध, लोभ, मोह, स्पृहा और जन्म-मृत्युका शिकार बनता है। आत्मासे तो इनका कोई सम्बन्ध ही नहीं है॥ १५॥

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