पुष्पोद्यानानि रम्याणि पूजायात्रोत्सवाश्रितान्॥ ५०
madarcāṃ sampratiṣṭhāpya mandiraṃ kārayed dṛḍham|
puṣpodyānāni ramyāṇi pūjāyātrotsavāśritān|| 50
अर्थ
यदि शक्ति हो तो उपासक सुन्दर और सुदृढ़ मन्दिर बनवाये और उसमें मेरी प्रतिमा स्थापित करे। सुन्दर-सुन्दर फूलोंके बगीचे लगवा दे; नित्यकी पूजा, पर्वकी यात्रा और बड़े-बड़े उत्सवोंकी व्यवस्था कर दे॥ ५०॥✎ 1769
मदर्चां सम्प्रतिष्ठाप्य मन्दिरं कारयेद् दृढम्।
पुष्पोद्यानानि रम्याणि पूजायात्रोत्सवाश्रितान्॥ ५०
यदि शक्ति हो तो उपासक सुन्दर और सुदृढ़ मन्दिर बनवाये और उसमें मेरी प्रतिमा स्थापित करे। सुन्दर-सुन्दर फूलोंके बगीचे लगवा दे; नित्यकी पूजा, पर्वकी यात्रा और बड़े-बड़े उत्सवोंकी व्यवस्था कर दे॥ ५०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.27.50 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 881) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/27/50/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)