श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.25.3

एकादश स्कन्ध · अध्याय 25 · अथ पञ्चविंशोऽध्यायः

काम ईहा मदस्तृष्णा स्तम्भ आशीर्भिदा सुखम्।

मदोत्साहो यशःप्रीतिर्हास्यं वीर्यं बलोद्यमः॥ ३

kāma īhā madastṛṣṇā stambha āśīrbhidā sukham|

madotsāho yaśaḥprītirhāsyaṃ vīryaṃ balodyamaḥ|| 3

अर्थ

रजोगुणकी वृत्तियाँ हैं—इच्छा, प्रयत्‍न, घमंड, तृष्णा (असन्तोष), ऐंठ या अकड़, देवताओंसे धन आदिकी याचना, भेदबुद्धि, विषयभोग, युद्धादिके लिये मदजनित उत्साह, अपने यशमें प्रेम, हास्य, पराक्रम और हठपूर्वक उद्योग करना आदि॥ ३॥

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