श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.20.4

एकादश स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

पितृदेवमनुष्याणां वेदश्‍चक्षुस्तवेश्‍वर।

श्रेयस्त्वनुपलब्धेऽर्थे साध्यसाधनयोरपि॥ ४

pitṛdevamanuṣyāṇāṃ vedaścakṣustaveśvara|

śreyastvanupalabdhe'rthe sādhyasādhanayorapi|| 4

अर्थ

सर्वशक्तिमान् परमेश्‍वर! आपकी वाणी वेद ही पितर, देवता और मनुष्योंके लिये श्रेष्ठ मार्ग-दर्शकका काम करता है; क्योंकि उसीके द्वारा स्वर्ग-मोक्ष आदि अदृष्ट वस्तुओंका बोध होता है और इस लोकमें भी किसका कौन-सा साध्य है और क्या साधन—इसका निर्णय भी उसीसे होता है॥ ४॥

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