॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.20.2
वर्णाश्रमविकल्पं च प्रतिलोमानुलोमजम्।
द्रव्यदेशवयःकालान् स्वर्गं नरकमेव च॥ २
varṇāśramavikalpaṃ ca pratilomānulomajam|
dravyadeśavayaḥkālān svargaṃ narakameva ca|| 2
अर्थ
वर्णाश्रम-भेद, प्रतिलोम और अनुलोमरूप वर्णसंकर, कर्मोंके उपयुक्त और अनुपयुक्त द्रव्य, देश, आयु और काल तथा स्वर्ग और नरकके भेदोंका बोध भी वेदोंसे ही होता है॥ २॥