ब्रह्मन्! (यद्यपि हम आपके शुभागमन और शुभ दर्शनसे ही कृतकृत्य हो गये हैं) तथापि आपसे उन धर्मोंके—साधनोंके सम्बन्धमें प्रश्न कर रहे हैं, जिनको मनुष्य श्रद्धासे सुन भर ले तो इस सब ओरसे भयदायक संसारसे मुक्त हो जाय॥ ७॥
ब्रह्मंस्तथापि पृच्छामो धर्मान् भागवतांस्तव।
याञ्छ्रुत्वा श्रद्धया मर्त्यो मुच्यते सर्वतोभयात्॥ ७
ब्रह्मन्! (यद्यपि हम आपके शुभागमन और शुभ दर्शनसे ही कृतकृत्य हो गये हैं) तथापि आपसे उन धर्मोंके—साधनोंके सम्बन्धमें प्रश्न कर रहे हैं, जिनको मनुष्य श्रद्धासे सुन भर ले तो इस सब ओरसे भयदायक संसारसे मुक्त हो जाय॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.2.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 714) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/2/7/