kā vidyā hrīḥ parā kā śrīḥ kiṃ sukhaṃ duḥkhameva ca|| 30
अर्थ
श्रीमान् केशव! पुरुषका सच्चा बल क्या है? भग किसे कहते हैं? और लाभ क्या वस्तु है? उत्तम विद्या, लज्जा, श्री तथा सुख और दुःख क्या है?॥ ३०॥
पुंसः किंस्विद् बलं श्रीमन् भगो लाभश्च केशव।
का विद्या ह्रीः परा का श्रीः किं सुखं दुःखमेव च॥ ३०
श्रीमान् केशव! पुरुषका सच्चा बल क्या है? भग किसे कहते हैं? और लाभ क्या वस्तु है? उत्तम विद्या, लज्जा, श्री तथा सुख और दुःख क्या है?॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.19.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 831) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/19/30/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)