श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.19.25

एकादश स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

यदाऽऽत्मन्यर्पितं चित्तं शान्तं सत्त्वोपबृंहितम्।

धर्मं ज्ञानं सवैराग्यमैश्‍वर्यं चाभिपद्यते॥ २५

yadā''tmanyarpitaṃ cittaṃ śāntaṃ sattvopabṛṃhitam|

dharmaṃ jñānaṃ savairāgyamaiśvaryaṃ cābhipadyate|| 25

अर्थ

इस प्रकारके धर्मोंका पालन करनेसे चित्तमें जब सत्त्वगुणकी वृद्धि होती है और वह शान्त होकर आत्मामें लग जाता है, उस समय साधकको धर्म, ज्ञान, वैराग्य और ऐश्‍वर्य स्वयं ही प्राप्त हो जाते हैं॥ २५॥

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