श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.19.11

एकादश स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

श्रीभगवानुवाच

इत्थमेतत् पुरा राजा भीष्मं धर्मभृतां वरम्।

अजातशत्रुः पप्रच्छ सर्वेषां नोऽनुशृण्वताम्॥ ११

itthametat purā rājā bhīṣmaṃ dharmabhṛtāṃ varam|

ajātaśatruḥ papraccha sarveṣāṃ no'nuśṛṇvatām|| 11

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णने कहा—उद्धवजी! जो प्रश्‍न तुमने मुझसे किया है, यही प्रश्‍न धर्मराज युधिष्ठिरने धार्मिकशिरोमणि भीष्मपितामहसे किया था। उस समय हम सभी लोग वहाँ विद्यमान थे॥ ११॥✎ 1753

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1753 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: पंच-तन्मात्रा—ये → पंचतन्मात्रा—ये

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें