pratigraho'dhyāpanaṃ ca brāhmaṇasyaiva yājanam|| 40
अर्थ
यज्ञ-यागादि, अध्ययन और दान करनेका अधिकार ब्राह्मण, क्षत्रिय एवं वैश्योंको समानरूपसे है। परन्तु दान लेने, पढ़ाने और यज्ञ करानेका अधिकार केवल ब्राह्मणोंको ही है॥ ४०॥✎ 17511752
इज्याध्ययनदानानि सर्वेषां च द्विजन्मनाम्।
प्रतिग्रहोऽध्यापनं च ब्राह्मणस्यैव याजनम्॥ ४०
यज्ञ-यागादि, अध्ययन और दान करनेका अधिकार ब्राह्मण, क्षत्रिय एवं वैश्योंको समानरूपसे है। परन्तु दान लेने, पढ़ाने और यज्ञ करानेका अधिकार केवल ब्राह्मणोंको ही है॥ ४०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.17.40 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 818) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/17/40/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)