श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.16.6

एकादश स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

श्रीभगवानुवाच

एवमेतदहं पृष्टः प्रश्‍नं प्रश्‍नविदां वर।

युयुत्सुना विनशने सपत्‍नैरर्जुनेन वै॥ ६

evametadahaṃ pṛṣṭaḥ praśnaṃ praśnavidāṃ vara|

yuyutsunā vinaśane sapatnairarjunena vai|| 6

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णने कहा—प्रिय उद्धव! तुम प्रश्‍नका मर्म समझनेवालोंमें शिरोमणि हो। जिस समय कुरुक्षेत्रमें कौरव-पाण्डवोंका युद्ध छिड़ा हुआ था, उस समय शत्रुओंसे युद्धके लिये तत्पर अर्जुनने मुझसे यही प्रश्‍न किया था॥ ६॥

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