॥ श्रीहरिः ॥
ब्रह्मण्यानां बलिरहं वीराणामहमर्जुनः।
भूतानां स्थितिरुत्पत्तिरहं वै प्रतिसङ्क्रमः॥ ३५
brahmaṇyānāṃ balirahaṃ vīrāṇāmahamarjunaḥ|
bhūtānāṃ sthitirutpattirahaṃ vai pratisaṅkramaḥ|| 35
अर्थ
उद्धवजी! मैं ब्राह्मणभक्तोंमें बलि, वीरोंमें अर्जुन और प्राणियोंमें उनकी उत्पत्ति, स्थिति और प्रलय हूँ॥ ३५॥
ब्रह्मण्यानां बलिरहं वीराणामहमर्जुनः।
भूतानां स्थितिरुत्पत्तिरहं वै प्रतिसङ्क्रमः॥ ३५
उद्धवजी! मैं ब्राह्मणभक्तोंमें बलि, वीरोंमें अर्जुन और प्राणियोंमें उनकी उत्पत्ति, स्थिति और प्रलय हूँ॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.16.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 812) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/16/35/