श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.16.22

एकादश स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

पुरोधसां वसिष्ठोऽहं ब्रह्मिष्ठानां बृहस्पतिः।

स्कन्दोऽहं सर्वसेनान्यामग्रण्यां भगवानजः॥ २२

purodhasāṃ vasiṣṭho'haṃ brahmiṣṭhānāṃ bṛhaspatiḥ|

skando'haṃ sarvasenānyāmagraṇyāṃ bhagavānajaḥ|| 22

अर्थ

मैं पुरोहितोंमें वसिष्ठ, वेदवेत्ताओंमें बृहस्पति, समस्त सेनापतियोंमें स्वामिकार्तिक और सन्मार्गप्रवर्तकोंमें भगवान् ब्रह्मा हूँ॥ २२॥✎ 1750

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1750 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: महा-पुरुषोंमें) → महापुरुषोंमें)

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