श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.16.21

एकादश स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

धिष्ण्यानामस्म्यहं मेरुर्गहनानां हिमालयः।

वनस्पतीनामश्‍वत्थ ओषधीनामहं यवः॥ २१

dhiṣṇyānāmasmyahaṃ merurgahanānāṃ himālayaḥ|

vanaspatīnāmaśvattha oṣadhīnāmahaṃ yavaḥ|| 21

अर्थ

मैं निवासस्थानोंमें सुमेरु, दुर्गम स्थानोंमें हिमालय, वनस्पतियोंमें पीपल और धान्योंमें जौ हूँ॥ २१॥✎ 1750

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1750 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: महा-पुरुषोंमें) → महापुरुषोंमें)

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