॥ श्रीहरिः ॥
इन्द्रोऽहं सर्वदेवानां वसूनामस्मि हव्यवाट्।
आदित्यानामहं विष्णू रुद्राणां नीललोहितः॥ १३
indro'haṃ sarvadevānāṃ vasūnāmasmi havyavāṭ|
ādityānāmahaṃ viṣṇū rudrāṇāṃ nīlalohitaḥ|| 13
अर्थ
समस्त देवताओंमें इन्द्र, आठ वसुओंमें अग्नि, द्वादश आदित्योंमें विष्णु और एकादश रुद्रोंमें नीललोहित नामका रुद्र हूँ॥ १३॥✎ 1748 1749
इन्द्रोऽहं सर्वदेवानां वसूनामस्मि हव्यवाट्।
आदित्यानामहं विष्णू रुद्राणां नीललोहितः॥ १३
समस्त देवताओंमें इन्द्र, आठ वसुओंमें अग्नि, द्वादश आदित्योंमें विष्णु और एकादश रुद्रोंमें नीललोहित नामका रुद्र हूँ॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.16.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 810) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/16/13/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
- #1748 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: ज्ञान-शक्तिप्रधान → ज्ञानशक्तिप्रधान
- #1749 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: क्रिया-शक्ति-प्रधान → क्रिया-शक्तिप्रधान