श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.16.13

एकादश स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

इन्द्रोऽहं सर्वदेवानां वसूनामस्मि हव्यवाट्।

आदित्यानामहं विष्णू रुद्राणां नीललोहितः॥ १३

indro'haṃ sarvadevānāṃ vasūnāmasmi havyavāṭ|

ādityānāmahaṃ viṣṇū rudrāṇāṃ nīlalohitaḥ|| 13

अर्थ

समस्त देवताओंमें इन्द्र, आठ वसुओंमें अग्‍नि, द्वादश आदित्योंमें विष्णु और एकादश रुद्रोंमें नीललोहित नामका रुद्र हूँ॥ १३॥✎ 1748 1749

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1748 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: ज्ञान-शक्तिप्रधान → ज्ञानशक्तिप्रधान
  • #1749 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: क्रिया-शक्ति-प्रधान → क्रिया-शक्तिप्रधान

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें