श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.15.35

एकादश स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

सर्वासामपि सिद्धीनां हेतुः पतिरहं प्रभुः।

अहं योगस्य सांख्यस्य धर्मस्य ब्रह्मवादिनाम्॥ ३५

sarvāsāmapi siddhīnāṃ hetuḥ patirahaṃ prabhuḥ|

ahaṃ yogasya sāṃkhyasya dharmasya brahmavādinām|| 35

अर्थ

ब्रह्मवादियोंने बहुत-से साधन बतलाये हैं—योग, सांख्य और धर्म आदि। उनका एवं समस्त सिद्धियोंका एकमात्र मैं ही हेतु, स्वामी और प्रभु हूँ॥ ३५॥

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