श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.14.8

एकादश स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

एवं प्रकृतिवैचित्र्याद् भिद्यन्ते मतयो नृणाम्।

पारम्पर्येण केषाञ्चित् पाखण्डमतयोऽपरे॥ ८

evaṃ prakṛtivaicitryād bhidyante matayo nṛṇām|

pāramparyeṇa keṣāñcit pākhaṇḍamatayo'pare|| 8

अर्थ

इसी प्रकार स्वभावभेद तथा परम्परागत उपदेशके भेदसे मनुष्योंकी बुद्धिमें भिन्‍नता आ जाती है और कुछ लोग तो बिना किसी विचारके वेदविरुद्ध पाखण्डमतावलम्बी हो जाते हैं॥ ८॥

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