संयमी पुरुष स्त्रियों और उनके प्रेमियोंका संग दूरसे ही छोड़कर, पवित्र एकान्त स्थानमें बैठकर बड़ी सावधानीसे मेरा ही चिन्तन करे॥ २९॥
स्त्रीणां स्त्रीसंगिनां संगं त्यक्त्वा दूरत आत्मवान्।
क्षेमे विविक्त आसीनश्चिन्तयेन्मामतन्द्रितः॥ २९
संयमी पुरुष स्त्रियों और उनके प्रेमियोंका संग दूरसे ही छोड़कर, पवित्र एकान्त स्थानमें बैठकर बड़ी सावधानीसे मेरा ही चिन्तन करे॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.14.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 802) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/14/29/