॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.14.10
धर्ममेके यशश्चान्ये कामं सत्यं दमं शमम्।
अन्ये वदन्ति स्वार्थं वा ऐश्वर्यं त्यागभोजनम्॥ १०
dharmameke yaśaścānye kāmaṃ satyaṃ damaṃ śamam|
anye vadanti svārthaṃ vā aiśvaryaṃ tyāgabhojanam|| 10
अर्थ
पूर्वमीमांसक धर्मको, साहित्याचार्य यशको, कामशास्त्री कामको, योगवेत्ता सत्य और शमदमादिको, दण्डनीतिकार ऐश्वर्यको, त्यागी त्यागको और लोकायतिक भोगको ही मनुष्य-जीवनका स्वार्थ—परम लाभ बतलाते हैं॥ १०॥