श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.14.1

एकादश स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

अथ चतुर्दशोऽध्यायः

भक्तियोगकी महिमा तथा ध्यानविधिका वर्णन

उद्धव उवाच

वदन्ति कृष्ण श्रेयांसि बहूनि ब्रह्मवादिनः।

तेषां विकल्पप्राधान्यमुताहो एकमुख्यता॥ १

vadanti kṛṣṇa śreyāṃsi bahūni brahmavādinaḥ|

teṣāṃ vikalpaprādhānyamutāho ekamukhyatā|| 1

अर्थ

उद्धवजीने पूछा—श्रीकृष्ण! ब्रह्मवादी महात्मा आत्मकल्याणके अनेकों साधन बतलाते हैं। उनमें अपनी-अपनी दृष्टिके अनुसार सभी श्रेष्ठ हैं अथवा किसी एककी प्रधानता है?॥ १॥

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