उद्धवजीने पूछा—श्रीकृष्ण! ब्रह्मवादी महात्मा आत्मकल्याणके अनेकों साधन बतलाते हैं। उनमें अपनी-अपनी दृष्टिके अनुसार सभी श्रेष्ठ हैं अथवा किसी एककी प्रधानता है?॥ १॥
वदन्ति कृष्ण श्रेयांसि बहूनि ब्रह्मवादिनः।
तेषां विकल्पप्राधान्यमुताहो एकमुख्यता॥ १
उद्धवजीने पूछा—श्रीकृष्ण! ब्रह्मवादी महात्मा आत्मकल्याणके अनेकों साधन बतलाते हैं। उनमें अपनी-अपनी दृष्टिके अनुसार सभी श्रेष्ठ हैं अथवा किसी एककी प्रधानता है?॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.14.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 798) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/14/1/