॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.13.23
पंचात्मकेषु भूतेषु समानेषु च वस्तुतः।
को भवानिति वः प्रश्नो वाचारम्भो ह्यनर्थकः॥ २३
paṃcātmakeṣu bhūteṣu samāneṣu ca vastutaḥ|
ko bhavāniti vaḥ praśno vācārambho hyanarthakaḥ|| 23
अर्थ
देवता, मनुष्य, पशु, पक्षी आदि सभी शरीर पंच-भूतात्मक होनेके कारण अभिन्न ही हैं और परमार्थ-रूपसे भी अभिन्न हैं। ऐसी स्थितिमें ‘आप कौन हैं?’ आपलोगोंका यह प्रश्न ही केवल वाणीका व्यवहार है। विचारपूर्वक नहीं है, अतः निरर्थक है॥ २३॥