॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.13.22
वस्तुनो यद्यनानात्वमात्मनः प्रश्न ईदृशः।
कथं घटेत वो विप्रा वक्तुर्वा मे क आश्रयः॥ २२
vastuno yadyanānātvamātmanaḥ praśna īdṛśaḥ|
kathaṃ ghaṭeta vo viprā vakturvā me ka āśrayaḥ|| 22
अर्थ
‘ब्राह्मणो! यदि परमार्थरूप वस्तु नानात्वसे सर्वथा रहित है, तब आत्माके सम्बन्धमें आपलोगोंका ऐसा प्रश्न कैसे युक्तिसंगत हो सकता है? अथवा मैं यदि उत्तर देनेके लिये बोलूँ भी तो किस जाति, गुण, क्रिया और सम्बन्ध आदिका आश्रय लेकर उत्तर दूँ?॥ २२॥