श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.11.23

एकादश स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

श्रद्धालुर्मे कथाः शृण्वन् सुभद्रा लोकपावनीः।

गायन्‍ननुस्मरन् कर्म जन्म चाभिनयन् मुहुः॥ २३

śraddhālurme kathāḥ śṛṇvan subhadrā lokapāvanīḥ|

gāyannanusmaran karma janma cābhinayan muhuḥ|| 23

अर्थ

मेरी कथाएँ समस्त लोकोंको पवित्र करनेवाली एवं कल्याणस्वरूपिणी हैं। श्रद्धाके साथ उन्हें सुनना चाहिये। बार-बार मेरे अवतार और लीलाओंका गान, स्मरण और अभिनय करना चाहिये॥ २३॥

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