॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.11.19
गां दुग्धदोहामसतीं च भार्यां
देहं पराधीनमसत्प्रजां च।
वित्तं त्वतीर्थीकृतमंग वाचं
हीनां मया रक्षति दुःखदुःखी॥ १९
gāṃ dugdhadohāmasatīṃ ca bhāryāṃ
dehaṃ parādhīnamasatprajāṃ ca|
vittaṃ tvatīrthīkṛtamaṃga vācaṃ
hīnāṃ mayā rakṣati duḥkhaduḥkhī|| 19
अर्थ
दूध न देनेवाली गाय, व्यभिचारिणी स्त्री, पराधीन शरीर, दुष्ट पुत्र, सत्पात्रके प्राप्त होनेपर भी दान न किया हुआ धन और मेरे गुणोंसे रहित वाणी व्यर्थ है। इन वस्तुओंकी रखवाली करनेवाला दुःख-पर-दुःख ही भोगता रहता है॥ १९॥✎ 1936