श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.10.36

एकादश स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

कथं वर्तेत विहरेत् कैर्वा ज्ञायेत लक्षणैः।

किं भुंजीतोत विसृजेच्छयीतासीत याति वा॥ ३६

kathaṃ varteta viharet kairvā jñāyeta lakṣaṇaiḥ|

kiṃ bhuṃjītota visṛjecchayītāsīta yāti vā|| 36

अर्थ

बद्ध अथवा मुक्त पुरुष कैसा बर्ताव करता है, वह कैसे विहार करता है, या वह किन लक्षणोंसे पहचाना जाता है, कैसे भोजन करता है? और मल-त्याग आदि कैसे करता है? कैसे सोता है, कैसे बैठता है और कैसे चलता है?॥ ३६॥

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