श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.10.34

एकादश स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

काल आत्माऽऽगमो लोकः स्वभावो धर्म एव च।

इति मां बहुधा प्राहुर्गुणव्यतिकरे सति॥ ३४

kāla ātmā''gamo lokaḥ svabhāvo dharma eva ca|

iti māṃ bahudhā prāhurguṇavyatikare sati|| 34

अर्थ

प्यारे उद्धव! जब मायाके गुणोंमें क्षोभ होता है, तब मुझ आत्माको ही काल, जीव, वेद, लोक, स्वभाव और धर्म आदि अनेक नामोंसे निरूपण करने लगते हैं। (ये सब मायामय हैं। वास्तविक सत्य मैं आत्मा ही हूँ)॥ ३४॥

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