श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.10.24

एकादश स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

स्वपुण्योपचिते शुभ्रे विमान उपगीयते।

गन्धर्वैर्विहरन् मध्ये देवीनां हृद्यवेषधृक्॥ २४

svapuṇyopacite śubhre vimāna upagīyate|

gandharvairviharan madhye devīnāṃ hṛdyaveṣadhṛk|| 24

अर्थ

उसे उसके पुण्योंके अनुसार एक चमकीला विमान मिलता है और वह उसपर सवार होकर सुर-सुन्दरियोंके साथ विहार करता है। गन्धर्वगण उसके गुणोंका गान करते हैं और उसके रूप-लावण्यको देखकर दूसरोंका मन लुभा जाता है॥ २४॥

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