श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.1.2

एकादश स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

ये कोपिताः सुबहु पाण्डुसुताः सपत्‍नै-

र्दुर्द्यूतहेलनकचग्रहणादिभिस्तान् ।

कृत्वा निमित्तमितरेतरतः समेतान्

हत्वा नृपान् निरहरत् क्षितिभारमीशः॥ २

ye kopitāḥ subahu pāṇḍusutāḥ sapatnai-

rdurdyūtahelanakacagrahaṇādibhistān |

kṛtvā nimittamitaretarataḥ sametān

hatvā nṛpān niraharat kṣitibhāramīśaḥ|| 2

अर्थ

कौरवोंने कपटपूर्ण जूएसे, तरह-तरहके अपमानोंसे तथा द्रौपदीके केश खींचने आदि अत्याचारोंसे पाण्डवोंको अत्यन्त क्रोधित कर दिया था। उन्हीं पाण्डवोंको निमित्त बनाकर भगवान् श्रीकृष्णने दोनों पक्षोंमें एकत्र हुए राजाओंको मरवा डाला और इस प्रकार पृथ्वीका भार हलका कर दिया॥ २॥

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