एक दिन यदुवंशके कुछ उद्दण्ड कुमार खेलते-खेलते उनके पास जा निकले। उन्होंने बनावटी नम्रतासे उनके चरणोंमें प्रणाम करके प्रश्न किया॥ १३॥
क्रीडन्तस्तानुपव्रज्य कुमारा यदुनन्दनाः।
उपसंगृह्य पप्रच्छुरविनीता विनीतवत्॥ १३
एक दिन यदुवंशके कुछ उद्दण्ड कुमार खेलते-खेलते उनके पास जा निकले। उन्होंने बनावटी नम्रतासे उनके चरणोंमें प्रणाम करके प्रश्न किया॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.1.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 711) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/1/13/