श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.90.29

दशम स्कन्ध · अध्याय 90 · अथ नवतितमोऽध्यायः

आस्थितस्य परं धर्मं कृष्णस्य गृहमेधिनाम्।

आसन् षोडशसाहस्रं महिष्यश्‍च शताधिकम्॥ २९

āsthitasya paraṃ dharmaṃ kṛṣṇasya gṛhamedhinām|

āsan ṣoḍaśasāhasraṃ mahiṣyaśca śatādhikam|| 29

अर्थ

इसीलिये वे गृहस्थोचित श्रेष्ठ धर्मका आश्रय लेकर व्यवहार कर रहे थे। परीक्षित्! मैं तुमसे कह ही चुका हूँ कि उनकी रानियोंकी संख्या थी सोलह हजार एक सौ आठ॥ २९॥

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