श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.90.28

दशम स्कन्ध · अध्याय 90 · अथ नवतितमोऽध्यायः

एवं वेदोदितं धर्ममनुतिष्ठन् सतां गतिः।

गृहं धर्मार्थकामानां मुहुश्‍चादर्शयत् पदम्॥ २८

evaṃ vedoditaṃ dharmamanutiṣṭhan satāṃ gatiḥ|

gṛhaṃ dharmārthakāmānāṃ muhuścādarśayat padam|| 28

अर्थ

परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्ण सत्पुरुषोंके एकमात्र आश्रय हैं। उन्होंने वेदोक्त धर्मका बार-बार आचरण करके लोगोंको यह बात दिखला दी कि घर ही धर्म, अर्थ और काम—साधनका स्थान है॥ २८॥

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