॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.90.21
प्रियरावपदानि भाषसे
मृतसंजीविकयानया गिरा।
करवाणि किमद्य ते प्रियं
वद मे वल्गितकण्ठ कोकिल॥ २१
priyarāvapadāni bhāṣase
mṛtasaṃjīvikayānayā girā|
karavāṇi kimadya te priyaṃ
vada me valgitakaṇṭha kokila|| 21
अर्थ
री कोयल! तेरा गला बड़ा ही सुरीला है, मीठी बोली बोलनेवाले हमारे प्राणप्यारेके समान ही मधुर स्वरसे तू बोलती है। सचमुच तेरी बोलीमें सुधा घोली हुई है, जो प्यारेके विरहसे मरे हुए प्रेमियोंको जिलानेवाली है। तू ही बता, इस समय हम तेरा क्या प्रिय करें?॥ २१॥