mauḍhyaṃ paśyata me yo'haṃ śraddadhe klībakatthanam|| 40
अर्थ
अब वह ब्राह्मण भगवान् श्रीकृष्णके सामने ही अर्जुनकी निन्दा करने लगा। वह बोला—‘मेरी मूर्खता तो देखो, मैंने इस नपुंसककी डींगभरी बातोंपर विश्वास कर लिया॥ ४०॥
तदाऽऽह विप्रो विजयं विनिन्दन् कृष्णसन्निधौ।
मौढ्यं पश्यत मे योऽहं श्रद्दधे क्लीबकत्थनम्॥ ४०
अब वह ब्राह्मण भगवान् श्रीकृष्णके सामने ही अर्जुनकी निन्दा करने लगा। वह बोला—‘मेरी मूर्खता तो देखो, मैंने इस नपुंसककी डींगभरी बातोंपर विश्वास कर लिया॥ ४०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.89.40 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 697) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/89/40/