॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.89.32
तत् कथं नु भवान् कर्म दुष्करं जगदीश्वरैः।
चिकीर्षसि त्वं बालिश्यात् तन्न श्रद्दध्महे वयम्॥ ३२
tat kathaṃ nu bhavān karma duṣkaraṃ jagadīśvaraiḥ|
cikīrṣasi tvaṃ bāliśyāt tanna śraddadhmahe vayam|| 32
अर्थ
ब्राह्मणने कहा—अर्जुन! यहाँ बलरामजी, भगवान् श्रीकृष्ण, धनुर्धरशिरोमणि प्रद्युम्न, अद्वितीय योद्धा अनिरुद्ध भी जब मेरे बालकोंकी रक्षा करनेमें समर्थ नहीं हैं; इन जगदीश्वरोंके लिये भी यह काम कठिन हो रहा है; तब तुम इसे कैसे करना चाहते हो? सचमुच यह तुम्हारी मूर्खता है। हम तुम्हारी इस बातपर बिलकुल विश्वास नहीं करते॥ ३१-३२॥