श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.88.4

दशम स्कन्ध · अध्याय 88 · अथाष्टाशीतितमोऽध्यायः

ततो विकारा अभवन् षोडशामीषु कंचन।

उपधावन् विभूतीनां सर्वासामश्‍नुते गतिम्॥ ४

tato vikārā abhavan ṣoḍaśāmīṣu kaṃcana|

upadhāvan vibhūtīnāṃ sarvāsāmaśnute gatim|| 4

अर्थ

त्रिविध अहंकारसे सोलह विकार हुए—दस इन्द्रियाँ, पाँच महाभूत और एक मन। अतः इन सबके अधिष्ठातृ-देवताओंमेंसे किसी एककी उपासना करनेपर समस्त ऐश्‍वर्योंकी प्राप्ति हो जाती है॥ ४॥✎ 896

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #896 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् से → भगवान्‌से

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें