आप तो सब प्रकारसे समर्थ हैं। इस समय आप क्या करना चाहते हैं? यदि मेरे सुननेयोग्य कोई बात हो तो बतलाइये। क्योंकि संसारमें देखा जाता है कि लोग सहायकोंके द्वारा बहुत-से काम बना लिया करते हैं॥ ३०॥
यदि नः श्रवणायालं युष्मद्व्यवसितं विभो।
भण्यतां प्रायशः पुम्भिर्धृतैः स्वार्थान् समीहते॥ ३०
आप तो सब प्रकारसे समर्थ हैं। इस समय आप क्या करना चाहते हैं? यदि मेरे सुननेयोग्य कोई बात हो तो बतलाइये। क्योंकि संसारमें देखा जाता है कि लोग सहायकोंके द्वारा बहुत-से काम बना लिया करते हैं॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.88.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 691) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/88/30/