pauraiḥ sabhājito'bhīkṣṇaṃ rāmeṇājānatā ca saḥ|| 4
अर्थ
अर्जुन सुभद्राको प्राप्त करनेके लिये वहाँ वर्षाकालमें चार महीनेतक रहे। वहाँ पुरवासियों और बलरामजीने उनका खूब सम्मान किया। उन्हें यह पता न चला कि ये अर्जुन हैं॥ ४॥
तत्र वै वार्षिकान् मासानवात्सीत् स्वार्थसाधकः।
पौरैः सभाजितोऽभीक्ष्णं रामेणाजानता च सः॥ ४
अर्जुन सुभद्राको प्राप्त करनेके लिये वहाँ वर्षाकालमें चार महीनेतक रहे। वहाँ पुरवासियों और बलरामजीने उनका खूब सम्मान किया। उन्हें यह पता न चला कि ये अर्जुन हैं॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.86.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 660) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/86/4/