श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.86.4

दशम स्कन्ध · अध्याय 86 · अथ षडशीतितमोऽध्यायः

तत्र वै वार्षिकान् मासानवात्सीत् स्वार्थसाधकः।

पौरैः सभाजितोऽभीक्ष्णं रामेणाजानता च सः॥ ४

tatra vai vārṣikān māsānavātsīt svārthasādhakaḥ|

pauraiḥ sabhājito'bhīkṣṇaṃ rāmeṇājānatā ca saḥ|| 4

अर्थ

अर्जुन सुभद्राको प्राप्त करनेके लिये वहाँ वर्षाकालमें चार महीनेतक रहे। वहाँ पुरवासियों और बलरामजीने उनका खूब सम्मान किया। उन्हें यह पता न चला कि ये अर्जुन हैं॥ ४॥

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