श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.86.38

दशम स्कन्ध · अध्याय 86 · अथ षडशीतितमोऽध्यायः

श्रुतदेवोऽच्युतं प्राप्तं स्वगृहांजनको यथा।

नत्वा मुनीन् सुसंहृष्टो धुन्वन् वासो ननर्त ह॥ ३८

śrutadevo'cyutaṃ prāptaṃ svagṛhāṃjanako yathā|

natvā munīn susaṃhṛṣṭo dhunvan vāso nanarta ha|| 38

अर्थ

प्रिय परीक्षित्! जैसे राजा बहुलाश्‍व भगवान् श्रीकृष्ण और मुनि-मण्डलीके पधारनेपर आनन्दम‌ग्‍न हो गये थे, वैसे ही श्रुतदेव ब्राह्मण भी भगवान् श्रीकृष्ण और मुनियोंको अपने घर आया देखकर आनन्दविह्वल हो गये; वे उन्हें नमस्कार करके अपने वस्त्र उछाल-उछालकर नाचने लगे॥ ३८॥

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