श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.86.37

दशम स्कन्ध · अध्याय 86 · अथ षडशीतितमोऽध्यायः

इत्युपामन्त्रितो राज्ञा भगवाँल्लोकभावनः।

उवास कुर्वन् कल्याणं मिथिलानरयोषिताम्॥ ३७

ityupāmantrito rājñā bhagavām̐llokabhāvanaḥ|

uvāsa kurvan kalyāṇaṃ mithilānarayoṣitām|| 37

अर्थ

परीक्षित्! सबके जीवनदाता भगवान् श्रीकृष्ण राजा बहुलाश्‍वकी यह प्रार्थना स्वीकार करके मिथिलावासी नर-नारियोंका कल्याण करते हुए कुछ दिनोंतक वहीं रहे॥ ३७॥

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