राजा बहुलाश्वने कहा—‘प्रभो! आप समस्त प्राणियोंके आत्मा, साक्षी एवं स्वयंप्रकाश हैं। हम सदा-सर्वदा आपके चरणकमलोंका स्मरण करते रहते हैं। इसीसे आपने हमलोगोंको दर्शन देकर कृतार्थ किया है॥ ३१॥
भवान् हि सर्वभूतानामात्मा साक्षी स्वदृग् विभो।
अथ नस्त्वत्पदाम्भोजं स्मरतां दर्शनं गतः॥ ३१
राजा बहुलाश्वने कहा—‘प्रभो! आप समस्त प्राणियोंके आत्मा, साक्षी एवं स्वयंप्रकाश हैं। हम सदा-सर्वदा आपके चरणकमलोंका स्मरण करते रहते हैं। इसीसे आपने हमलोगोंको दर्शन देकर कृतार्थ किया है॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.86.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 663) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/86/31/