जब सब लोग भोजन करके तृप्त हो गये, तब राजा बहुलाश्व भगवान् श्रीकृष्णके चरणोंको अपनी गोदमें लेकर बैठ गये। और बड़े आनन्दसे धीरे-धीरे उन्हें सहलाते हुए बड़ी मधुर वाणीसे भगवान्की स्तुति करने लगे॥ ३०॥
वाचा मधुरया प्रीणन्निदमाहान्नतर्पितान्।
पादावंकगतौ विष्णोः संस्पृशञ्छनकैर्मुदा॥ ३०
जब सब लोग भोजन करके तृप्त हो गये, तब राजा बहुलाश्व भगवान् श्रीकृष्णके चरणोंको अपनी गोदमें लेकर बैठ गये। और बड़े आनन्दसे धीरे-धीरे उन्हें सहलाते हुए बड़ी मधुर वाणीसे भगवान्की स्तुति करने लगे॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.86.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 663) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/86/30/