श्रीशुकदेवजी कहते हैं—प्रिय परीक्षित्! माता देवकीजीकी यह बात सुनकर भगवान् श्रीकृष्ण और बलराम दोनोंने योगमायाका आश्रय लेकर सुतल लोकमें प्रवेश किया॥ ३४॥
एवं संचोदितौ मात्रा रामः कृष्णश्च भारत।
सुतलं संविविशतुर्योगमायामुपाश्रितौ॥ ३४
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—प्रिय परीक्षित्! माता देवकीजीकी यह बात सुनकर भगवान् श्रीकृष्ण और बलराम दोनोंने योगमायाका आश्रय लेकर सुतल लोकमें प्रवेश किया॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.85.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 656) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/85/34/