श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.85.33

दशम स्कन्ध · अध्याय 85 · अथ पञ्चाशीतितमोऽध्यायः

तथा मे कुरुतं कामं युवां योगेश्‍वरेश्‍वरौ।

भोजराजहतान् पुत्रान् कामये द्रष्टुमाहृतान्॥ ३३

tathā me kurutaṃ kāmaṃ yuvāṃ yogeśvareśvarau|

bhojarājahatān putrān kāmaye draṣṭumāhṛtān|| 33

अर्थ

तुम दोनों योगीश्‍वरोंके भी ईश्‍वर हो। इसलिये आज मेरी भी अभिलाषा पूर्ण करो। मैं चाहती हूँ कि तुम दोनों मेरे उन पुत्रोंको, जिन्हें कंसने मार डाला था, ला दो और उन्हें मैं भर आँख देख लूँ॥ ३३॥

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