मैं जानता हूँ कि तुम दोनों मेरे पुत्र नहीं हो, सम्पूर्ण प्रकृति और जीवोंके स्वामी हो। पृथ्वीके भारभूत राजाओंके नाशके लिये ही तुमने अवतार ग्रहण किया है। यह बात तुमने मुझसे कही भी थी॥ १८॥
युवां न नः सुतौ साक्षात् प्रधानपुरुषेश्वरौ।
भूभारक्षत्रक्षपण अवतीर्णौ तथाऽऽत्थ ह॥ १८
मैं जानता हूँ कि तुम दोनों मेरे पुत्र नहीं हो, सम्पूर्ण प्रकृति और जीवोंके स्वामी हो। पृथ्वीके भारभूत राजाओंके नाशके लिये ही तुमने अवतार ग्रहण किया है। यह बात तुमने मुझसे कही भी थी॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.85.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 654) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/85/18/