जब सब बन्धु-बान्धव वहाँसे विदा हो चुके, तब भगवान् श्रीकृष्णको ही एकमात्र इष्टदेव माननेवाले यदुवंशियोंने यह देखकर कि अब वर्षा ऋतु आ पहुँची है, द्वारकाके लिये प्रस्थान किया॥ ७०॥✎ 1718
बन्धुषु प्रतियातेषु वृष्णयः कृष्णदेवताः।
वीक्ष्य प्रावृषमासन्नां ययुर्द्वारवतीं पुनः॥ ७०
जब सब बन्धु-बान्धव वहाँसे विदा हो चुके, तब भगवान् श्रीकृष्णको ही एकमात्र इष्टदेव माननेवाले यदुवंशियोंने यह देखकर कि अब वर्षा ऋतु आ पहुँची है, द्वारकाके लिये प्रस्थान किया॥ ७०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.84.70 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 652) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/84/70/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)