श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.84.6

दशम स्कन्ध · अध्याय 84 · अथ चतुरशीतितमोऽध्यायः

तान् दृष्ट्वा सहसोत्थाय प्रागासीना नृपादयः।

पाण्डवाः कृष्णरामौ च प्रणेमुर्विश्‍ववन्दितान्॥ ६

tān dṛṣṭvā sahasotthāya prāgāsīnā nṛpādayaḥ|

pāṇḍavāḥ kṛṣṇarāmau ca praṇemurviśvavanditān|| 6

अर्थ

ऋषियोंको देखकर पहलेसे बैठे हुए नरपतिगण, युधिष्ठिर आदि पाण्डव, भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजी सहसा उठकर खड़े हो गये और सबने उन विश्‍ववन्दित ऋषियोंको प्रणाम किया॥ ६॥

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