श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.84.44

दशम स्कन्ध · अध्याय 84 · अथ चतुरशीतितमोऽध्यायः

तद्दीक्षायां प्रवृत्तायां वृष्णयः पुष्करस्रजः।

स्नाताः सुवाससो राजन् राजानः सुष्ठ्वलंकृताः॥ ४४

taddīkṣāyāṃ pravṛttāyāṃ vṛṣṇayaḥ puṣkarasrajaḥ|

snātāḥ suvāsaso rājan rājānaḥ suṣṭhvalaṃkṛtāḥ|| 44

अर्थ

परीक्षित्! जब वसुदेवजीने यज्ञकी दीक्षा ले ली, तब यदुवंशियोंने स्नान करके सुन्दर वस्त्र और कमलोंकी मालाएँ धारण कर लीं, राजालोग वस्त्राभूषणोंसे खूब सुसज्जित हो गये॥ ४४॥

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