रानीजी! हमने पूर्वजन्ममें सबकी आसक्ति छोड़कर कोई बहुत बड़ी तपस्या की होगी। तभी तो हम इस जन्ममें आत्माराम भगवान्की गृह-दासियाँ हुई हैं॥ ३९॥
आत्मारामस्य तस्येमा वयं वै गृहदासिकाः।
सर्वसंगनिवृत्त्याद्धा तपसा च बभूविम॥ ३९
रानीजी! हमने पूर्वजन्ममें सबकी आसक्ति छोड़कर कोई बहुत बड़ी तपस्या की होगी। तभी तो हम इस जन्ममें आत्माराम भगवान्की गृह-दासियाँ हुई हैं॥ ३९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.83.39 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 642) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/83/39/