॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.83.30
तावन्मृदंगपटहाः शंखभेर्यानकादयः।
निनेदुर्नटनर्तक्यो ननृतुर्गायका जगुः॥ ३०
tāvanmṛdaṃgapaṭahāḥ śaṃkhabheryānakādayaḥ|
ninedurnaṭanartakyo nanṛturgāyakā jaguḥ|| 30
अर्थ
मैंने ज्यों ही वरमाला पहनायी त्यों ही मृदंग, पखावज, शंख, ढोल, नगारे आदि बाजे बजने लगे। नट और नर्तकियाँ नाचने लगीं। गवैये गाने लगे॥ ३०॥