श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.83.20

दशम स्कन्ध · अध्याय 83 · अथ त्र्यशीतितमोऽध्यायः

श्रुत्वैतत् सर्वतो भूपा आययुर्मत्पितुः पुरम्।

सर्वास्त्रशस्त्रतत्त्वज्ञाः सोपाध्यायाः सहस्रशः॥ २०

śrutvaitat sarvato bhūpā āyayurmatpituḥ puram|

sarvāstraśastratattvajñāḥ sopādhyāyāḥ sahasraśaḥ|| 20

अर्थ

जब यह समाचार राजाओंको मिला, तब सब ओरसे समस्त अस्त्र-शस्त्रोंके तत्त्वज्ञ हजारों राजा अपने-अपने गुरुओंके साथ मेरे पिताजीकी राजधानीमें आने लगे॥ २०॥✎ 1716

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1716 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: स्वयंवर-सभामें → स्वयंवरसभामें

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